संगठनात्मक संरचना के साथ-साथ कार्यकर्ता विकास पर हुआ मंथन
दो दिन तक 23 प्रांत के पदाधिकारियों ने की संगठनात्मक चर्चा

राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष, भारत का स्व एवं स्वदेशी जीवनशैली पर हुआ प्रबोधन
प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत संयोजक बैठक का हुआ समापन
10 एवं 11 जनवरी को सेज विश्वविद्यालय परिसर में हुआ आयोजन
देशभर से संगठन के प्रमुख पदाधिकारी, विचारक और कार्यकर्ता हुए शामिल
प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत संयोजक बैठक का रविवार को समापन हुआ। बैठक में संगठनात्मक संरचना के साथ-साथ कार्यकर्ता विकास पर मंथन हुआ। 23 प्रांत के पदाधिकारियों ने संगठनात्मक विस्तार की जानकारी दी। दो दिवसीय बैठक में राष्ट्रगीत वन्देमातरम के 150 वर्ष, भारत का स्व एवं स्वदेशी जीवनशैली आदि विषयों पर प्रबोधन हुआ।
विशेष सत्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य द्वारा “भारत का स्व और पंच परिवर्तन के स्वदेशी जीवन शैली, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक अनुशासन आदि विषय पर मार्गदर्शन प्रदान किया। जबकि प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे.नंद कुमार द्वारा “वन्देमातरम के 150 वर्ष सहित अन्य विषयों पर प्रकाश डाला।
उल्लेखनीय है कि सेज यूनिवर्सिटी परिसर में 10 एवं 11 जनवरी को प्रज्ञा प्रवाह की दो दिवसीय अखिल भारतीय बैठक का आयोजन किया गया था। अखिल भारतीय बैठक में देश के 23 प्रांत के संयोजक,सह संयोजक एवं अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। शनिवार को जहां विभिन्न आयामों के समानांतर सत्र आयोजित हुए, वहीं रविवार को सभी प्रांत पदाधिकारियों ने बीते वर्ष में किये गए विशेष कार्यों की जानकारी दी एवं आगामी कार्ययोजना के विषय में भी बताया।
समापन से पहले शताब्दी वर्ष, पंच परिवर्तन, गुरु तेग बहादुर तथा बिरसा मुंडा बलिदान आदि विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। कार्यकर्ता विकास सत्र भी आयोजित किया गया। इस विशेष सत्र में नेतृत्व निर्माण, अनुशासन और सेवा भावना पर विशेष जोर दिया गया। अंतिम सत्र में जिज्ञासाओं का समाधान एवं प्रश्नों का उत्तर दिया गया। सायं 5 बजे राष्ट्रगीत वन्देमातरम गायन के साथ दो दिवसीय बैठक का समापन हुआ।

